Monday, 19 August 2019

These 7 Personalities Were Born In Pakistan But Always Stayed Indian By Heart

After scrapping of article 370 from the Indian constitution things are off between India and Pakistan. The residents of both countries are showing their anger and hatred openly on social media. But no matter how much we hate each other, we are connected in some way or other.

Do you know that several eminent Indian personalities are originally born in Pakistan? Millions of people left Pakistan and migrated to India after partition and some of them became successful and famous and will always be remembered as Indians.

These are the prominent personalities who were Pakistani by birth but stayed Indian by heart.

1. Manmohan Singh

The former Prime Minister of India Manmohan Singh was born on 24 September 1932 in Punjab province of British India which is presently in Pakistan. After the partition, his family moved to India and he completed his higher education from Punjab University.

2. Lal Krishna Advani

The senior leader of Bhartiya Janata Party LK Advani was born on 8 November 1927 in Karachi. His family migrated to India after partition and played a major role in the making of one of the biggest parties of the nation, BJP.

3. Yash Chopra

Born in the city of Lahore in Punjab province in British India (now in Pakistan) on 27 September 1932, Yash Chopra along with his family moved to India after partition and he went on to become of the greatest filmmakers of all times. He was even honored by Padma Bhushan in 2005.

4. Sunil Dutt

The Bollywood star who is now no more was born in a village Khurdi in Jhelum district of Punjab state in British India, which is now in Pakistan. He gave some classic movies which will be remembered forever and later joined politics and won several elections.

5. Bhagat Singh

Freedom fighter Bhagat Singh who gave his life for his motherland was also born in Pakistan. He was born on 19 October 1907, in Banga Pakistan. He was one of the youngest fighters who was sentenced to death by the British government.

6. Gulzar

Sampoorn Singh Kalra, known by his pen name Gulzar, was born 14 August 1936, in a village named Dina of Jhelum district, Punjab. The village is now in Pakistan. He is a famous poet, screenwriter, film director, and playwright.

7. Milkha Singh

Prior to partition born in Lailpur on 8 October 1935. Singh lost his parents during the chaos created during partition. He came to India with his remaining family. He represented India at the 1960 Summer Olympics in Rome and the 1979 Summer Olympics in Tokyo and earned the nickname “Udta Sikh”.

सावधान इंडिया की अभिनेत्री अपने बोल्ड लुक के कारण प्रसिद्ध है, देखें उनकी तस्वीरें

नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है| लाइफ ओके चैनल सावधान इंडिया के लिए बहुत ही लोकप्रिय है और इस शो में 3000 से ज्यादा एपिसोड आ चुके हैं इस शो में अब तक कई अभिनेत्रियों ने काम किया है और आज हम आपको एक अभिनेत्री के बारे में बताने जा रहे हैं जो बोर्ड लुक के कारण बहुत मशहूर है|


वह लोग इनके काफी ज्यादा पसंद करते हैं| हम आपको बता दें कि इस एक्ट्रेस तपस्या श्रीवास्तव और छोटे पर्दे करे कारण जानी जाती है| तपस्या ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा के कैमियो रोल के तौर पर भी की थी और उनके बाद तपस्या सावधान इंडिया के एपिसोड में देखा गया था|


दर्शक ने देखना बहुत पसंद करते हैं यह अपने बोल्ड लुक के कारण जानी जाती है| यह देखने में बहुत ही सुंदर दिखाई देती है और छोटे पर्दे पर प्यार के चिड़ियाघर और चक्रवर्ती अशोक सम्राट जैसे टीवी धारावाहिक में भी उन्होंने काम किया है और तपस्या अपने शो में भी काम करने में बहुत रुचि रखती है इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी बहुत पसंद की जाती है वह दर्शकों ने बहुत ज्यादा पसंद भी करते हैं और इनकी तस्वीरों को शेयर करना पसंद करते हैं|

केवल पेट की चर्बी कम करना कैसे संभव है ?

पेट की चर्बी कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म को तेज करने के भी जरूरत होती है. जिसके के लिए नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट की जरूरत होती है. डाइट में कम कैलोरी और लो फैट वाली डाइट को शामिल करना होता है. 


शरीर में फैट का जमाव हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है. हर किसी का मोटापा भी अलग-अलग तरह का होता है. किसी को पेट की चर्बी (Belly Fat) वाला मोटापा होता है. तो किसी के पूरे शरीर में फैट व मोटापा होता है. कुछ लोगों के जांघों में बहुत अधिक फैट जमा हो जाता है. शरीर के किसी भी अंग में अधिक फैट शरीर को बेकार बनाता है. बेहतर शरीर और हेल्थ के लिए अनुपातिक फैट होना चाहिए. पेट की चर्बी (Belly Fat) की समस्या सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करती है. हाल के वर्षों में इस परेशानी से लोग ज्यादा परेशान भी हुए हैं..

जो लोग पेट की चर्बी (Belly Fat) वाले मोटापा से परेशान हैं वो वजन कम करने की तो सोचते हैं, लेकिन उनकी समस्या यह होती है कि क्या केवल पेट की चर्बी को कम करना संभव है ? यह ऐसा सवाल है जिसका हल अभी तक नहीं निकला है. लेकिन इसके बारे में कुछ रिसर्च हुए हैं. अगर आप भी पूरे शरीर का वजन कम किये बिना सिर्फ पेट का मोटापा (Belly Fat) घटाना चाहते हैं तो क्या यह संभव है ? आइए जानते हैं..
क्या केवल पेट की चर्बी को कम करना संभव है ?
जब हम वजन कम करने के लिए किसी एक एरिया को सलेक्ट करते हैं तो उसे स्पॉट रिडक्शन कहते हैं. कई रिसर्च में यह आया है कि कभी-कभी स्पॉट रिडक्शन वेट लॉस प्लान सफल नहीं होता है..
जर्नल ऑफ स्ट्रेंथ कंडीशनिंग रिसर्च में प्रकाशित एक शोध के अनुसार 6 सप्ताह एब्स वर्कआउट भी एक इंसान के पेट की चर्बी को कम नहीं कर पाता है. एक अन्य रिसर्च की मानें तो 12 सप्ताह हाथ के वर्कआउट करने के बाद भी हाथ का फैट कम नहीं हुआ, जबकि हाथ की चर्बी ढीली से टाइट हो चुकी थी..
इन दोनों ही शोध से पता चलता है कि कई मामलों में वर्कआउट या एक्सरसाइज भी वजन घटाने में मदद नहीं करते हैं. खासकर पेट की चर्बी कम करने में ऐसा अक्सर होता है..
डॉक्टर और एक्सपर्ट्स बताते हैं कि शरीर के विशेष हिस्से का जब हम वजन कम करना चाहते हैं, या मोटापा घटाना चाहते हैं तो कई बार यह सफल नहीं होता है. लेकिन अगर आप नियमित एक्सरसाइज करते हैं तो फैट बर्न करने में मदद तो मिलती है..
मेटाबॉलिक रेट को लेकर एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर आप पेट की चर्बी कम करना चाहते हैं तो आपको हाई मेटाबॉलिक रेट की जरूरत होती है. बेहतर मेटॉबालिक रेट के लिए नियमित एक्सरसाइज सबसे अच्छा माना जाता है..
एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि बेली फैट कम करने के लिए मेटाबॉलिक रेट ठीक करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. जितना अच्छा मेटॉबालिक रेट होता है उतना ही जल्दी पेट का मोटापा कम होता है. इसे वजन घटाने का सबसे अच्छा और नायाब तरीका माना जाता है..
यह कैसे होता है ?
अब यह समझना जरूरी है कि मेटाबॉलिक रेट बेली फैट को कैसे कम करता है. जब भी कोई इंसान वर्कआउट या एक्सरसाइज करता है तो शरीर से एक हार्मोन निकलता है. यह हार्मोन मेटाबॉलिक रेट को तेज करता है और शरीर में जमा फैट कम होने लगता है..
पेट, हाथ और छाती में जमा फैट या चर्बी मेटाबॉलिक रेट तेज होने पर ही कम होती है. मेटाबॉलिक रेट को बेहतर करने के लिए हेल्दी डाइट और रोजाना एक्सरसाइज की जरूरत होती है..
इसके विपरीत कूल्हों, बट और जांघों में जो फैट जमा होता है वह आसानी से कम नहीं होता है. इसका कारण यह होता है कि इसका मेटाबॉलिक रेट से कोई संबंध नहीं होता है..
पेट कम करने की एक्सरसाइज 
वैसे तो पेट कम करने की एक्सरसाइज के बारे में बहुत लोग लिखते हैं और पढ़ा भी जाता है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कोई एक वर्कआउट पेट कम करने के व्यायाम के तौर पर नहीं जाना जा सकता है..
कई रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि एरोबिक, दौड़ना, स्विमिंग, साइकिल चलाने जैसी एक्सरसाइज पूरे शरीर को फिट रखने और वजन कम करने के लिए सबसे अच्छे व्यायाम हैं. इसके अलावा इन वर्कआउट की मदद से पेट की चर्बी को आसानी से कम किया जा सकता है..
इसके अलावा पेट की चर्बी कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म को तेज करने के भी जरूरत होती है. जिसके के लिए नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट की जरूरत होती है. डाइट में कम कैलोरी और लो फैट वाली डाइट को शामिल करना होता है..

बढ़े हुए पेट को कम करने में बेहद कारगर हैं ये तीन एक्सरसाइज, जरूर आजमाएं

आजकल की लाइफ स्टाइल और अनियमित खानपान के चलते कई सारी हेल्थ सम्बंधी समस्याओं ने लोगों को जकड़ लिया है। जैसे कि आज के समय में अधिकांश लोग बढ़े हुए पेट की समस्या झेल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है घंटो में ऑफिस में बैठना और फॉस्ट फूड का सेवन। वैसे आज इस समस्या के कारणों पर बात नहीं करेंगे बल्कि हम आपको इस समस्या का समाधान बताएंगे।



असल में, ज्यादातर समय बैठे रहने से या फिर अधिक तला-भुनी वाली चीजें खाने के कारण क्सर पेट और कमर के पास फैट जम जाता है। हालांकि ये पुरी बॉडी के मोटापे से काफी अलग है, जबकि लोग बढ़ेह हुए पेट को मोटापा समझ उसके लिए घंटो में जिम में पसीना बहाते हैं। ऐसे में आप चाहें जितना भी एक्सरसाइज कर लें कमर का फैट नहीं जाता है। असल में इसके लिए आपको अलग से एक्सरसाइज की जरूरत होती है, ताकी पेट के पास का हिस्सा स्ट्रेच हो और वहां का फैट हटे । आज हम आपको ऐसे ही कुछ एक्सरसाइज बताने जा रहे हैं।

प्लैंक एक्सरसाइज


जी हां, प्‍लैंक एक्‍सरसाइज बढ़े हुए पेट से निजात पाने के लिए सबसे बहतर है, असल में इसे करने से पेट के मसल्स में खिंचाव होता है और वहां जमा फैट खत्म होता है। इसे करने के लिए आपको पेट के बल लेटने के बाद धीरे धीरे शरीर के बीच का हिस्सा उठाना होता है, यानी कि आपकी पूरी बॉडी हाथों और पैर के पंजो के सहारे जमीन पर टिकी होती है। ऐसा आपको नियमित रूप से 2 से 5 मिनट तक करना है, हालांकि इसकी शुरूआत आपको कुछ सेकेंड्स के साथ करनी होगी, क्योंकि शुरूआती दौर में इसे करन थोड़ा कठीन हो सकता है। लेकिन नियमित रूप से अभ्यास करने से ये आसान लगने लगता है और कुछ ही दिनों में आप पाएंगे इसके चलते आपकी बॉडी पूरी शेप में आ जाती है।

सिंगल और डबल लेग स्ट्रेच


सिंगल और डबल लेग स्ट्रेच भी पेट की चर्बी कम करने में काफी कारगर साबित होते हैं, इसके लिए आपको पीठ के बल लेटकर पैरों को सामने की तरफ घुमाना होता है। पहले आपको एक-एक पैर अलग घुमाने होते हैं और फिर दोनो एक साथ। इसके भी पेट पर काफी स्ट्रेच पड़ता है और फैट कम होता है।

सूर्य प्रणाम


वैसे तो पेट के फैट को कम करने के लिए कई सारे योग क्रियाएं बताई गई हैं, लेकिन अगर आप एक योग में सभी की फायदा लेना चाहते हैं तो आपको सूर्य प्रणाम करना चाहिए। इसमें भुजंगासन, हस्तातुन्नासन से लेकर वो भी सभी आसन आ जाते हैं, जो कि पेट के मसल्स के लिए बेहतर होते हैं। असल में नियमित रूप से सूर्य प्रणाम करने से पाचन भी बेहतर होता है, ऐसे में अतिरिक्त फैट से निजात मिलता है।

Sunday, 18 August 2019

'नायरा' से किसी मायने में कम नहीं हैं उनकी छोटी बहन, देखें स्टाइलिश लुक

ये रिश्ता क्या कहलाता है की एक्ट्रेस शिवांगी जोशी अपने फैशनेबल अंदाज और बढ़िया एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं. मोहसिन खान संग शिवांगी जोशी की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री की जनता दीवानी है. कम ही लोगों को पता है कि शिवांगी की एक छोटी बहन भी है, जो किसी मायने में शिवांगी जोशी से कम नहीं हैं.


शिवांगी की बहन का नाम शीतल है. सभी बहनों की जोड़ी की तरह शिवांगी और शीतल के बीच भी बेहद प्यार है. इतना ही नहीं दोनों एक दूसरे के साथ अपने कपड़े भी शेयर करती हैं.
इसके साथ ही शीतल और शिवांगी सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ खूब तस्वीरें भी शेयर करती हैं. अगर आप शीतल जोशी का इंस्टाग्राम देखें तो आपको उनकी बेहद खूबसूरत और स्टाइलिश तस्वीरें देखने को मिलेंगी.
शीतल और शिवांगी की शक्लें भी काफी हद तक मिलती हैं. दोनों की साथ में ली गईं तस्वीरों में ये बात साफ देखी जा सकती है. ये दोनों बहनें खूब मस्तीखोर हैं.
शीतल अपने परिवार से बेहद प्यार करती हैं. उन्हें अपने दोस्तों के साथ हैंगऑउट करना भी बेहद पसंद है.
शीतल की दोस्ती शिवांगी के को-स्टार्स से भी है. उन्हें कई बार ये रिश्ता क्या कहलाता है के स्टार्स के साथ पार्टी करते देखा गया था.
शीतल जोशी की तस्वीरें बताती हैं कि वो भी एक्टिंग इंडस्ट्री के लिए बनी हैं. ऐसे में ये बोलना गलत नहीं होगा कि हम उन्हें कभी किसी सीरियल में काम करते जरूर देखना चाहेंगे.


Photo Source - Instagram

Saturday, 17 August 2019

Tiger A True Story of Vengeance & Survival:

Tiger A True Story of Vengeance & Survival:
AS OF 2008, THERE WERE AN ESTIMATED FOUR HUNDRED AND FIFTY tigers living in Primorye, southern Khabarovsk Territory, and their adjacent border regions—down from a postwar high of roughly five hundred in the late 1980s. (By comparison, the state of Texas, a place that has no natural history of tigers, has more than two thousand of them living in various forms of captivity.) This may sound like a lot of tigers, but it is nothing compared to what the wild population was a hundred years ago. At the beginning of the last century, it is estimated that there were more than 75,000 tigers living in Asia. Today, you would never know; within the fragile envelope of a single human memory 95 percent of those animals have been killed—for sport, for beauty, for medicine, for money, for territory, and for revenge. Looking at distribution maps of tigers then and now is like looking at maps of European Jewry before and after World War II: you simply cannot believe your eyes. It is hard to imagine such a thing is possible, especially when you consider that tigers have accompanied our species throughout its entire history on the Asian continent and have been embraced for their physical, aesthetic, and iconic power. Because of its beauty, charisma, and mythic resonance, the tiger has been adopted as a kind of totem animal worldwide. There is no other creature that functions simultaneously as a poster child for the conservation movement and as shorthand for power, sex, and danger. Like a fist, or a cross, the tiger is a symbol we all understand. Of the eight commonly recognized tiger subspecies, three of them—the Balinese, the Javan, and the Caspian—have become extinct in the past two generations, and a fourth, the South China tiger, has not been seen in the wild since 1990. No reliable tiger sightings have been reported from the Koreas since 1991. Today, the tiger has been reduced to isolated pockets of relic populations scattered across the vast territory over which it once roamed freely. Current estimates indicate a total wild population of around 3,200 and falling. Making this situation more upsetting, especially for conservationists, is the fact that this cascading trend could be reversed tomorrow. Left alone, with enough cover and prey, there are two things tigers do exceptionally well: adapt and breed. In nature, versatility equals viability, and in this, tigers rival human beings. Until around 1940, tigers could be found almost anywhere on the Asian continent from Hong Kong to Iran and from Bali to Sakhalin Island—and at any habitable altitude: tigers have been sighted in Nepal at 13,000 feet, and they are still somewhat common in the semi-amphibious mangrove swamps of the Sundarbans. Nor are they terribly choosy: as long as quantities are sufficient, tigers take their protein where and how they find it. And this is often exactly wherever the strain lies: Panthera tigris and human are literally abundantly alike, and we are drawn to many of the same things, if for slightly different reasons. Both people demand massive territories; each people have prodigious appetites for meat; each people need management over our elbow room and area unit ready to defend it, and each North American country|folks|people} have a huge sense of claim to the resources around us. If a tiger will poach on another’s territory, it probably will, and so, of course, will we. A key difference, however, is that tigers take only what they need. This is why, given the choice, many Russian hunters and farmers would rather have tigers around than wolves. The former are much less prone to surplus killing. What is happening to tigers now is analogous to what happened to the Neanderthals twenty-five thousand years ago, when that durable, proven species found itself unable to withstand the competitive force and expansion of Homo sapiens and was backed into a corner of southwestern Europe. There would have been a point when their numbers, too, began to visibly shrink, and falter, and finally disappear. There would have been a last one. Many human tribes have met the same fate since then, and many more are meeting it now. Today, it occurs not so much by death as by dilution: through resettlement, religious and economic conversion, and intermarriage, gradually the skills, stories, and languages fade away. Needless to say, once sheltered by a roof, carried in a car, and fed from a can, very few humans willingly return to sleeping on the ground, walking cross-country, and foraging with hand tools. The same is true of tigers: once they have been habituated to zoo conditions, there is no going back. To date, there has been no case of a captive tiger being successfully introduced, or reintroduced, to the wild. Captivity is a one-way trip. There is a poignant irony in this because, at one time or another, all of us have been in the tiger’s situation. The majority of us live how and where we do because, at some point in the recent past, we were forced out of our former habitats and ways of living by additional aggressive, if not better adapted, humans. Worth asking here is: wherever will this trend ultimately lead? Is there a better way to honor the fact that we survived?

Whatsapp’s New Fingerprint Unlock Feature Will Keep Your Chats Safe From Others

Free messaging app Whatsapp will soon be introduced by a new feature which will keep your chats safe from others around you. It might be bad news who love to interfere in others life, but it is a piece of good news for the others who have so many secrets shared on the social media app.



The new feature fingerprint unlocking in the app will be one extra level to your privacy.

According to WABetaInfo, the current version is being tested by the beta users where they are allowed to enter the app using the fingerprint scanner on their smartphone to get into the app.

Regulars users will also be able to use the new feature soon and can get rid of the third-party security app. One more thing. Users will also be able to set a timer on the fingerprint unlock. When you are continuously chatting on Whatsapp with someone you can set the timer for 30 minutes so that it does not shut down completely.